A Literary Reading of Pinjar – Amrita Pritam’s Book

इस literary blog में आज हम बात करेंगे modern Punjabi literature की पहली prominent writer, अमृता प्रीतम और उनके iconic novel, पिंजर’, की। India – Pakistan partition पर based एक ऐसी कहानी जिसे जिया तो हज़ारों औरतों ने, लेकिन लिखा अमृता प्रीतम ने।

15 साल की पूरो का रिश्ता रामचंद से तय होता है, लेकिन पूरो की ख़ुशियाँ उस समय बर्बाद हो जाती है जब रशीद उसका अपहरण कर लेता है। यह एक पुश्तैनी दुश्मनी की वजह से हुआ जिसका शिकार पूरो बनी। पूरो किसी तरह भागकर वापस अपने घर पहुँचती है, लेकिन अब पूरो के माँ – बाप उसको वापस घर में लेने से मना कर देते है। कुछ समय बाद India – Pakistan का partition होता है। इस हिंसा भरे दौर मे रामचंद की बहन का अपहरण हो जाता है, और रशीद की मदद से पूरो उसे आजाद कराती है। कहानी के अंत में पूरो का भाई उससे भारत चलने को कहत है, मगर पूरो तय करती है कि वह पाकिस्तान में रशीद के साथ ही रहेगी।


आख़िर वो क्या बातें हैं जो इस novel को एक undying literary phenomenon बनाती हैं?

  • क्या औरत की अपनी भी कोई पहचान होती है, या वो सिर्फ़ एक पिंजर है?
  • क्या Societal pressure रिश्ते, भावनाओं और इंसानियत से भी बड़ा होता है?
  • क्या अपनों का दरवाज़ा बंद हो जाए तो इंसान दुश्मन को अपना मान सकता है?
  • क्या motherhood हमेशा एक choice होती है, या कभी-कभी यह भी थोपी जाती है?
  • क्या survival और acceptance एक जैसे होते हैं, या दोनों में फ़र्क़ होता है?
  • क्या पुत्र मोह, या फिर लड़के जैसी importance कभी लड़की को भी मिल पाएगी?
  • क्या एक अपराध करने वाला इंसान वक़्त के साथ redemption का हक़दार हो सकता है?
  • क्या फ़र्क़ पड़ता है दंगा धर्म के नाम पर हो, दुश्मनी के नाम पर या देश के, शिकार हमेशा औरत ही क्यू होती है?

पिंजर में जिस sensitivity से identity displacement, forced motherhood, societal pressure, trauma और survival की depth को दिखाया गया है, यही psychology आज भी उतनी ही relatable लगती है। चाहे आप Garam Hawa (1973), 1947 Earth (1998), Khamosh Paani (2003), Bawandar (2000), Lipstick Under My Burkha (2016) और Thappad (2020) जैसी films को ही क्यों न देखें।

इसे जानने और महसूस करने के लिए पढ़िए हमारा Premium Literary Blog जो एक evocative नज़र डालता है author की ज़िंदगी पर, novel की emotional soul पर, और कैसे यह timeless literary gem बन गयी Indian cinema की सबसे powerful फ़िल्मों में से एक।


Read the Book. Watch the Movie. Because this is where it all began.

हमें उमीद है कि आपने यह किताब पढ़ी होगी, तो comment box में share करे वो क्या बातें है जो आपकी नज़र में इस novel को iconic बनाती है।

You may also like...

Leave a Reply