A Literary Reading of Devdas -Sarat Chandra’s Book
इस literary blog में हम author शरत चंद्र चट्टोपाध्याय (Sarat Chandra Chattopadhyay) और उनके iconic novel देवदास (Devdas) पर बात करेंगे। एक ऐसा novel जिसे बहुत सराहा गया और आगे चलकर कई बार films के लिए भी adapt किया गया।
शरत चंद्र एक ऐसे author थे की जो अपनी ही कहानियों को लेकर self-doubt से भरे हुए थे। इसलिए अपने career की शुरुआत में उन्होंने ‘अनिला देवी’ और ‘अनुपमा’ नाम से लिखना शुरू किया, सिर्फ़ ये देखने के लिए कि दुनिया उनकी कहानियों को कैसे receive करती है।
एक ऐसे लेखक, जिनकी कहानियाँ वक़्त के साथ पुरानी नहीं हुईं, बल्कि आज भी relevant लगती है, और शायद इसी वजह से उनकी कई कहानियों ने Bollywood और regional cinema को deeply inspire किया।
Love stories तो दुनिया भर में लिखी गईं, Romeo-Juliet, लैला-मजनूं, हीर-रांझा, शीरीन फरहाद, और फिर आई शरत चंद्र की देवदास। एक ऐसी novel जिसका title “देवदास’ सिर्फ़ एक character नहीं रहा, बल्कि वो एक cultural reference बन गया, “क्या देवदास बना फिरता है?”
देवदास शरत चंद्र चट्टोपाध्याय का एक classic tragedy love-story novel है। बचपन से देवदास और पार्वती (Parvati) एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन family, society और ego की वजह से दोनों दूर हो जाते हैं। पार्वती किसी और से शादी कर लेती है, और टूटा हुआ देवदास शराब में खुद को डुबोने लगता है और self-destruction mode में चला जाता है। इसी दौरान एक तवायफ चंद्रमुखी उसे प्यार करने लगती है, लेकिन देवदास शराब, heartbreak और पार्वती को एक आख़िरी बार देखने की ज़िद के बीच आख़िरकार मर जाता है।
1917 में published ये novel love, social pressure और personal tragedy को दिखाती है, जिसमें देवदास सिर्फ़ एक character नहीं रहा बल्कि देवदास became an emotion. एक sentimental lover जिसे दुनिया ने tragedy का poster boy बना दिया।
शरतचंद्र ने जिस Tragic hero को देवदास में गढ़ा, उसकी vibes हमें मुकद्दर का सिकंदर (1978), अमानुष (1975), रॉकस्टार (2011), और कबीर सिंह (2019) जैसी फ़िल्मों में भी देखने को मिलती है, जो कि सबूत है की tragic love stories का charm हमेशा बना रहेगा।
देवदास, एक ऐसा novel जिसे पढ़कर समझ आता है कि किस तरह प्यार, अहंकार और ग़लत फैसले, ये तीनों बातें ज़िंदगी का पूरा track बदल देती है।
“Devdas was not a hero, he was a man who destroyed himself.
If anything, he was a warning.”
— शरत चंद्र चट्टोपाध्याय
आख़िर वो क्या बातें हैं जो इस novel को एक undying literary phenomenon बनाती हैं?
- क्या emotional vulnerability एक universal human experience है?
- क्या ego और personal indecision प्यार को self-destruction की ओर ले जाते हैं?
- क्या societal expectations और family pressures, individual choices को define करते हैं?
- क्या tragic love हमेशा एक moral lesson देता है या सिर्फ़ emotional catharsis है?
- क्या flawed protagonist भी iconic और relatable बन सकते हैं?
इसे जानने और महसूस करने के लिए पढ़िए हमारा Premium Literary Blog जो एक evocative नज़र डालता है author की ज़िंदगी पर, novel की emotional soul पर, और कैसे यह timeless literary gem बन गयी Indian cinema की सबसे powerful फ़िल्मों में से एक।
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हमें उमीद है कि आपने यह किताब पढ़ी होगी, तो comment box में share करे वो क्या बातें है जो आपकी नज़र में इस novel को iconic बनाती है।
